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तिरोडा में वारकरी समप्रदाय परंपरा से चालू हुई काकड़ आरती परंपरा आज भी बड़े उत्साह से मंदिरों में‌ शहरवासी काकड आरती करते हैं

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तिरोडामें वारकरी समप्रदाय परंपरा से चालू हुई काकड़ आरती परंपरा आज भी बड़े उत्साह से मंदिरों में‌ शहरवासी काकड आरती करते हैं इन्हीं के साथ छोटे बच्चे बच्चियां बड़े उत्साह से काकड़ आरती में उपस्थित रहते हैं तिरोडा शहर , खामतलावअशोक वार्ड में स्थित विठ्ठल रुक्माई मंदिर मे सुबह 5:00 बजे से काकड़ आरती की शुरुआत होती है आरती के सुर कानों पर पढ़ते ही धार्मिक वातावरण निर्माण होता है मानो की पंढरपूर की अनुभूती होती हे है । बडी आश्चर्य की बात यह है की पंढरपूर मे जो
काकड आरती मराठी मे होती है । वही आरती यह मंदिर मे होती है। काकड़ आरती की शुरुआत कार्तिक महीने में कोजागिरी पूर्णिमा से शुरू होके मार्गशीर्ष पूर्णिमा तक चालू रहती है काकड़ आरती पूरे एक माह चलती है .हिंदू धर्म में भगवान को सुबह जगाने के लिए सुबह की आरती होती है इस वक्त भगवान की प्रतिमा को जोत से औवाड़ी जाती है इसलिए इसको काकड आरती बोलते हैं चतुर्मास में भगवान विष्णु ( विट्टल) यह नींद में रहते इन्हें उठाने हेतु काकड़ आरती परंपरा शुरू हुई, दर वर्ष अनुसार इस वर्ष भी दिनांक 8/11/ 2019 रोज शुक्रवार को कार्तिक प्रबोधिनी एकादशी शुभ दिन महाराष्ट्र के कुल देयवत श्री विठ्ठल रुक्माई जी की पालकी व दिंडी उत्सव आयोजन करने में आई है सभी भक्तगण पांडुरंग के पालकी में उपस्थित रहिए और पंढरपूर की अनुभूती लिजीए और अपने जीवन को सफल बनाइये पालकी की शुरुआत श्री विट्ठल रुख्मिनी मंदिर देवस्थान खामतलाव अशोक वार्ड 4:00 बजे से शुरू करके तिरोडा शहर की बभ्रह्मण करने के बाद विठ्ठल रुक्माई मंदिर में ही समाप्त की जाएगी………
@**आषाढी कार्तिक महोत्सव मंडळ
विठ्ठल रमंदिर देवस्थान खामतलाव अशोक वर्ड तिरोड़ा**@

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